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लम्हे की उम्र


आओ इस पल को पलकों मे बसा लें, मेरी जानेजाना

ना जाने कल क्या हो, किसे पता- किसने जाना



आओ लम्हों मे जिंदगी जी लें

लम्हे के एक चौथाई हिस्से मे तुम रुठोगी

दूसरे चौथाई हिस्से मे मै मनाऊंगा

तीसरे मे तुम मान जाओगी और मेरी खुशियाँ सातवें आसमान पे होगी

फिर, चौथे हिस्से मे हम ज़ुदा हो जाएंगे



आओ इस पल को पलकों मे बसा लें मेरी जानेजाना

ना जाने कल क्या हो, किसे पता- किसने जाना



काश! जुदाई चौथाई लम्हों जितनी छोटी होती ....


January 22, 2011 | 1:01 AM Comments  0 comments

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Ghazal.

सदियों की बात है शायद

उसको अभी तक याद है शायद



कभी ज़ाहिर किया नहीं

पर मुझसे उसको भी प्यार है शायद



रोया बहुत हूँ और आज भी अब तक

सामने पैमाना या आँसूओं का ज़ाम है शायद



रूठा तो कई बार - वक़्त किया ज़ाया बहुत

मुहब्बत के चंद लम्हे अबतक ज़हन में ताज़ा है शायद



जशन-ए-बर्बादी  या कहें इश्क इसे

दोनों में थोड़ा तो फ़र्क है शायद



हस्ती मिटती, ख़ाक मे मिलते- तो अच्छा था

ये ज़िन्दगी, साँसों का महज़  पुलिंदा है शायद 



























January 9, 2011 | 12:01 PM Comments  0 comments

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समाधान

दुनियाँ- जहान, 

      क्यूँ परीशां 

             मैं हिन्दू , तू मुसलमान

               इंसानियत बेआबरू,

                        एक सामान

                             मुद्दा : पहचान - पहचान 




                 आतंकवाद एक समस्या,

                             हक़ीकत- रोजमर्रा  

                                     इन्सानी ज़हन - बुनियाद 

                                            मानवीयता, सौहार्द , प्रेम 

                                                     एकमात्र समाधान 







   









October 22, 2010 | 11:10 AM Comments  0 comments

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वक़्त

आराम सी जिंदगी है
बस में कम ही चलता हूँ मैं .
याद है मुझे बिहार में एक बार - बस का वो अनोखा सफ़र .
जाड़े के मौसम में एक ही सीट पर .
मेरे हाथों को अक्सर ढक लेते थे तुम्हारे shawl ..............................




वक़्त बदल गया है .
इसका मिजाज़ अब कुछ और ही है .
पर उस घर-घराते, बाबा के पुराने radio पर anytime गाना लगाना .
newspaper लौटाने के बहाने कुछ पलों का वो साथ और उन्हीं सेकंड्स में झट से पूरी जिंदगी जी लेने का ज़ोर .
वो अपनी-अपनी छतों से एक ही तारे को एक साथ देखते रहना .
वो हमेशा मिलने की चाहत और एक-दूसरे में पूर्णतया समां जाने की अगन - और ना मिल पाने की घुटन .
वो लोगों की भीड़ में अनोखे अंदाज़ से मुझको देखना और वो छुपी-छुपी सी छुअन .
आह! क्या दिन थे....

February 13, 2010 | 12:02 PM Comments  0 comments

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जिंदगी

कहो तो ये कह दें कि तुम अभी भी बला की सुन्दर हो.
रेगिस्तान मे मचलती हुई समंदर हो.
उफान मे तो यूँ भी कोई कमी नही है.
और एक बार जो तुम नज़र भर के देख लो.
तो अभी भी दिल मे लाबा फूटते हैं.
जिस तरह तुम " जी" बुलाती हो.
जी करता है धड़कन वहीं रुक जाए....

यूँ तो मानती नही पर फिर भी.
यूँही जब ग़लती से कह देती हो " I still love you" .
तो ज़ी करता है कि बस यही जिंदगी हो ....

परन्तु, अचानक जब सपनों के यमराज़.
husband का जिक्र आता है.
ऐसा लगता है कि.
उत्तंग आसमान के रंगीन मखमली चादरों से उतार कर.
सड़क पे 'कृपया बायीं ओर' चलने को कहा जा रहा हो....

January 16, 2010 | 5:01 AM Comments  0 comments

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